अध्यात्म

तुलसी माता से जुडी कुछ रोचक जानकारी, कुछ प्रश्न और उनके सटीक उत्तर

Written by hindicharcha

नमस्कार दोस्तों आज की अध्यात्मिक हिंदी चर्चा में हम आपको बताएँगे तुलसी माता से जुडी कुछ रोचक बातें और उनका सटीक उत्तर, तो आइये जानते है कुछ प्रश्न जो सामान्यतः सभी लोग नहीं जानते…

पहला प्रश्न – तुलसी माता के पौधे को रविवार को जल क्यों नहीं चढ़ाते?

उत्तर – पेड़ में नित्य जल चढ़ाने से ऑक्सीकरण डिस्टर्ब होता है। जैसे मनुष्य उपवास करके शुद्ध होता है वैसे ही एक दिन का ब्रेक तुलसी माता के दिव्य पौधे को भी चाहिए। मिट्टी की उर्वरता सप्ताह में एक दिन का ब्रेक देने पर बढ़ जाती है।

दूसरा प्रश्न – तुलसी माता के सामने घी का दिया क्यों जलाया जाता हैं?

उत्तर – तुलसी माता औषधीय रस को हवा में छोडती है और रेडिएशन को दूर करने के साथ हवा के रोगाणुओं को मारकर हवा को रोगमुक्त बनाती है। घी का दिया सकारात्मक ऊर्जा का घेरा लगभग 5 मीटर का बनाता है। तुलसी माता के सामने दिया जलाने से इन दोनो का मिलन होता है। तुलसी माता के औषधीय रस और घी के दिये की गर्मी से गर्म होकर लगभग 5 मीटर तक घर मे फैलकर सकारात्मक ऊर्जा के साथ औषधीय हवा फेफड़ो तक पहुंचाते हैं।

तीसरा प्रश्न – तुलसी माता को शिव जी के लिंग पर क्यों नहीं चढ़ाया जाता?

उत्तर – शिव जी के लिंग उन मुख्य स्थलों पर स्थापित किये गए हैं जहां पृथ्वी पर सर्वाधिक रेडिएशन है। रेडिएशन को शिवलिंग वातावरण से खींच कर धरती के गर्भ में प्रस्थापित करके निष्क्रिय करता है। तुलसी माता रेडिएशन रोकती है। अतः इस कार्य मे विघ्न पहुंचेगा। इसलिए तुलसी माता की पत्ती को शिव लिंग पर चढ़ाना वर्जित है।

चौथा प्रश्न – तुलसी माता की पत्ती को सीधा चबाकर खाने के लिए मना किया जाता है। तुलसी माता की पत्ती को प्रसाद या मीठे में मिलाकर खाने को कहते है या गटकने को क्यों बोलते है?

उत्तर – तुलसी माता की पत्ती में पारे जैसा तीव्र औषधीय प्रभाव होता है जो सीधा दांतों के सहन ना कर पाने की स्तिथि में कठोर दांतो को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए इसको प्रसाद में मिलाकर या काढ़ा बनाकर लेने की सलाह दी जाती है । मुंह की लार तुलसी के रस में मिलकर पेट मे पहुंचती है।

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